उत्तराखण्ड

कक्षा 11 एवं 12 के 300 विद्यार्थियों ने लिया अंग एवं नेत्रदान जागरूकता अभियान में भाग, NDS स्कूल ऋषिकेश में हुआ आयोजन

ऋषिकेश-  NDS स्कूल, ऋषिकेश में अंग एवं नेत्रदान के महत्व पर एक जागरूकता सत्र का आयोजन विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती ललिता कृष्णास्वामी के मार्गदर्शन में किया गया। इस कार्यक्रम में कक्षा 11 एवं 12 के लगभग 300 विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

कार्यक्रम में श्री महिपाल चौहान (आई बैंक मैनेजर), श्री संचीत अरोड़ा (प्रोजेक्ट लीडर, मोहन फाउंडेशन), श्री अरुण शर्मा (प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव, मोहन फाउंडेशन) तथा सुश्री बिंदिया भाटिया (काउंसलर, आई बैंक, एम्स ऋषिकेश) ने विद्यार्थियों को अंग एवं नेत्रदान के महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने इससे जुड़े विभिन्न मिथकों और भ्रांतियों को दूर करते हुए बताया कि एक दाता कई लोगों को नया जीवन और दृष्टि प्रदान कर सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि भारत में अंगदान की दर अभी भी बहुत कम है, ऐसे में जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है।

इस अवसर पर विद्यालय की काउंसलर सुश्री नेहा भल्ला ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए अंगदान, स्क्तदान एवं नेत्रदान के महत्व को समझाया और अपना व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके पिता के निधन के बाद उनके परिवार ने नेत्रदान का निर्णय लिया, जिससे किसी जरूरतमंद को नई रोशनी मिल सकी। उनके इस अनुभव ने उपस्थित सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों को गहराई से प्रभावित किया तथा अंगदान के मानवीय पक्ष को समझने में मदद की।

सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, प्रश्न पूछे और विषय के प्रति अपनी जागरूकता एवं संवेदनशीलता का परिचय दिया। वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि आज के विद्यार्थी केवल श्रोता ही नहीं, बल्कि समाज में परिवर्तन लाने वाले संदेशवाहक भी बन सकते हैं। यदि वे अपने परिवारों और समाज में इस विषय पर खुलकर बातचीत शुरू करें, तो अंगदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित की जा सकती है और कई जिंदगियों को बचाया जा सकता है।

कार्यक्रम का समापन अंग एवं नेत्रदान के समर्थन में सामूहिक शपथ के साथ हुआ, जिसमें सभी ने इस महान कार्य को आगे बढ़ाने और अधिक से अधिक लोगों को इसके लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया। यह सत्र न केवल जानकारीपूर्ण रहा, बल्कि विद्यार्थियों के मन में संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत करने वाला साबित हुआ।

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